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Sunday, August 3, 2008

नैना देवी मंदिर में भगदड़, 146 की मौत

बिलासपुरः हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में नैना देवी मंदिर में मची भगदड़ में 146 लोगों की मौत हो गई और 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए। शनिवार से शुरू हो रहे श्रावण अष्टमी मेले की वजह से यहां हजारों लोगों की भीड़ थी। श्रद्धालुओं से खचाखच भरे मंदिर परिसर में सुबह 10 बजे अफवाह फैल गई कि पास की पहाड़ी में भूस्खलन हो रहा है, इसके बाद धक्कामुक्की हुई और भीड़ बेकाबू हो गई।
मंदिर में हादसे के वक्त करीब 25,000 लोग मौजूद थे। भूस्खलन की अफवाह फैलते ही मंदिर से लौट रहे श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई और वे दौड़ने लगे। सड़क से मंदिर तक पहुंचने के लिए चार किलोमीटर लंबा पैदल ट्रेक है, अफरातफरी मचते ही ये लोग ऊपर मंदिर की तरफ जाते लोगों पर गिर पड़े और हड़कंप मच गया। औरतें और बच्चे इस भगदड़ की चपेट में बुरी तरह आ गए। मरने वालों में 40 से ज्यादा बच्चे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ लोग रेलिंग से कूद गए और जो कूद नहीं पाए वे दूसरों के ऊपर चढ़कर भागने लगे। गंभीर रूप से जख्मी लोगों को आनंदपुर साहिब और चंडीगढ़ के अस्पतालों में भेजा गया है। बारिश के वजह से लोगों को निकालने और अस्पताल ले जाने का काम प्रभावित हुआ।
हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव पी। सी. कपूर ने बताया कि मंदिर में आए अधिकतर लोगों में श्रद्धालु पंजाब और हिमाचल के थे। आमतौर पर यहां रोजाना करीब 10,000 लोग आते हैं लेकिन श्रावण अष्टमी के मेले की वजह से यहां दोगुनी भीड़ थी। हादसे की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत के कामों में जुट गए। नैना देवी मंदिर ऊंचाई पर स्थित है और सड़क से ऊपर जाने के लिए लोगों को पैदल चढ़ना पड़ता है। इसके लिए लोग पालकी का भी सहारा लेते हैं। यह मंदिर देशभर में स्थित 52 शक्ति पीठों में आता है। मान्यता है कि अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से नाराज सती ने अपनी आहुति दे दी। इससे उग्र शिव तांडव करने लगे। विश्व को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के शव को 52 टुकड़ों में बांट अलग अलग जगह गिरा दिया। जहां-जहां ये गिरे वहां शक्ति पीठ बन गए। माना जाता है कि जिस जगह पर सती की आंखें गिरीं, वहीं नैना देवी मंदिर है।

Saturday, August 2, 2008

कैटरीना और रणबीर करेंगे ‘राजनीति

‘गंगाजल’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्म बनाने वाले प्रकाश झा की अगली फिल्म में रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ जैसे सितारों का होना अटपटा लगता है। इन दोनों को झा ने अपनी फिल्म ‘राजनीति’ में मुख्य भूमिका निभाने के लिए चुना है। अजय देवगन, अर्जुन रामपाल और मनोज बाजपेयी भी ‍इस फिल्म का हिस्सा है।
प्रकाश झा ने अपनी फिल्मों के लिए हमेशा सशक्त कलाकार ही चुने हैं। कैटरीना को अभिनेत्री कम और स्टार ज्यादा माना जाता है। झा के साथ काम करना कैटरीना के लिए लाभप्रद साबित हो सकता है, क्योंकि अब झा जैसे निर्देशक भी उन्हें अपनी फिल्मों के लिए लेने लगे हैं, जिनकी फिल्में वास्तविकता के करीब होती हैं।
रणबीर और कैटरीना की यह दूसरी फिल्म साथ में होगी। इसके पहले राजकुमार संतोषी ने भी उन्हें अपनी फिल्म ‘अजब प्रेम की गजब कथा’ के लिए चुना है। ज्यादातर फिल्मों में कैटरीना अपनी उम्र से कही बड़े नायकों के साथ नजर आई हैं। अब वे हमउम्र नायकों की नायिका बनना चाहती हैं।
बताया जा रहा है कि ‘राजनीति’ की प्रेरणा महाभारत से ली गई है। इसे आधुनिक स्वरूप में दिखाया जाएगा। यह फिल्म प्रकाश झा का महँगा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।

Friday, August 1, 2008

सेक्सी होने का फायदा है : अमृता अरोड़ा

बॉलिवुड में उनके सफर की शुरुआत 'कितने दूर कितने पास' से हुई। फिल्म नहीं चली। इसके बाद की कई फिल्में भी एक के बाद एक कर पिटती गईं। यानी बॉक्स ऑफिस पर उन्हें जरा भी भाव नहीं मिला। इसके बावजूद, स्टार बनने की राह पर उनका सफर लगातार जारी रहा और आज वह एक स्टार बन चुकी हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं अमृता अरोड़ा की। हॉट गर्ल मलाइका अरोड़ा खान की बहन अमृता की पहचान आज उनके दम पर है। आज उनके पास कई अच्छे प्रोजेक्ट्स हैं और इनमें काम करते हुए उन्हें काफी मन भी लग रहा है। वह खुद कही हैं, 'आज मेरे पास 'हेलो' और 'मेरा भारत महान' जैसे बेहतरीन प्रोजेक्ट्स हैं और इनमें काम करने में मुझे बड़ा मजा आ रहा है।' पिछले दिनों अमृता से मुलाकात हुई, तो कई और मुद्दों पर बात हुई।
मलाइका की बहन हूं, पर अपनी अलग पहचान है
मलाइका जैसी बहन पाना अपने आप में बड़ी अच्छी बात है, लेकिन इससे एक दुखद पहलू भी जुड़ा है। वह यह कि लोग मुझसे भी मलाइका जैसी बनने की उम्मीदें पाल लेते हैं। वे यह नहीं समझते या नहीं समझना चाहते कि मैं और मलाइका दो अलग-अलग व्यक्ति हैं। मैं मलाइको को बहुत चाहती हूं और वह मुझे बेहद अच्छी भी लगती है, लेकिन मेरी अपनी शख्सियत है, जिसकी पहचान किसी और से नहीं जुड़ी है।
सेक्सी लुक है, तो बढ़िया है
मैं अपने लुक का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना खूब जानती हूं। ऐसे में इनोसेंट व थोड़ा सेक्सी लुक होना अच्छा ही रहता है। लुक्स में इन दोनों चीजों का तालमेल बड़ा कारगर साबित होता है। मैं तो इसे आजमाने और हकीकत में बदलने की भरसक कोशिश करती हूं।
करना चाहती थी, सो कम कर लिया वजन मैं कुछ समय से अपना वजन कम करना चाहती थी और इसीलिए पिछले दिनों मैंने खुद को काफी हल्का किया है। वैसे, मैंने किसी खास फिल्म या किसी प्रोजेक्ट की वजह से ऐसा नहीं किया है। मैं योग व मेडिटेशन का नियमित अभ्यास करती हूं। साथ ही, खाने-पीने में भी यह ध्यान रखती हूं कि जो भी खाऊं, वह सेहत के लिए फायदेमंद हो। मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है।
अरबाज पर गुस्सा आया, पर हंस कर टाल गई
पिछले दिनों फिल्म 'हेलो' की शूटिंग के दौरान एक मामूली हादसा हुआ था, जिसमें मैं गिर गई थी। मैं एक गाने की शूटिंग के दौरान अरबाज के साथ डांस कर रही थी। यह गाना बड़ा फास्ट था। इतने फास्ट म्यूजिक पर डांस करते हुए मैं मुंह के बल गिर गई और मुझे बुरी तरह चोट लगी। इस पर तुर्रा यह कि अरबाज उस क्लिपिंग को बार-बार प्ले कर रहे थे। शुरू में तो मुझे बड़ा बुरा लगा,लेकिन बाद में मैंने हंस कर बात आई-गई कर दी।
सात फेरे की बात अभी नहीं शादी का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। इस बारे में अभी कुछ चल भी नहीं रहा है। फिलहाल तो जिंदगी जिस तरह चल रही है, उससे मैं बेहद खुश हूं।
ऐक्टिंग छोड़, कुछ नहीं जानती
फिल्मों को लेकर बचपन से ही मैं जबर्दस्त क्रेजी थी। आज अगर मैं फिल्मों में नहीं होती, तो क्या होती, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती। यह सोचकर ही मुझे डर लगता है कि मैं ऐक्टिंग के अलावा कुछ और नहीं जानती हूं।
सलमान सबसे हॉट
बॉलिवुड में जितने भी 'हंक' हैं, उन सबमें सलमान भाई का जवाब नहीं। वह सबसे ज्यादा हॉट हैं। उनकी छवि ऐसी है, जो पर्दे के लिए एकदम फिट है। वैसे सैफ भी कूल ड्यूड हैं, लेकिन सलमान का जवाब नहीं।
सलमान को इंसाफ मिलेगा
सलमान को जो कोई भी जानता है, उसे पता है कि वह किसी को दुख नहीं पहुंचा सकते। मुझे देश के कानून में पूरा भरोसा है और मुझे पूरी उम्मीद है कि सलमान को इंसाफ मिलेगा।

प्यार में नहीं, सेक्स में भरोसा: शर्लिन

यह तो मानना पड़ेगा कि बॉलिवुड की हॉट गर्ल शर्लिन चोपड़ा का एक्सपोज़र के मामले में कोई जवाब नहीं है।उनका पेटा का कैंपेन कौन भूल सकता है?इसेदेखकर लगता है जैसे हम किसी बी ग्रेड मूवी का सीन देख रहे हों?उन्होंने हाल ही में अपनी साथी कलाकार कोइना मित्रा की नाक की तुलना मशहूर पॉप सिंगर माइकल जैक्सन की सर्जरी से बिगड़ी नाक से की थी। तस्वीरों में:शर्लिन का है सबसे फैब्युलस फिगर शर्लिन के अनुसार उनके फोटो इतने खूबसूरत हैं कि उन्हें किसी म्यूजियम में रखा जा सकता है। उनका मानना है कि उनकी परफेक्ट बॉडी शेप और पर्सनैलिटी किसी भी आदमी को उनका दीवाना बना सकती हैं। तस्वीरों में: ज्यादा सेक्सी कौन? शर्लिन या राखी
वैसे अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाली शर्लिन काफी खुले विचारों की हैं। जब उनसे डेटिंग के बारे में पूछा गया,तो उन्होंने कहा,'मैं डेटिंग में नहीं,मेटिंग में विश्वास रखती हूं।'शर्लिन,इस लाइन में बोल्ड और बिंदास अंदाज से आप सुर्खिया तो बटोर सकती हैं,लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिकने के लिए बॉक्स ऑफिस पर हिट फिल्म की जरूरत होती है।

थोड़ा इंतजार! छोटी कारों की होगी भरमार

नई दिल्ली:साल 2010 तक इंडिया की स्मॉल कार मार्किट की रफ्तार फोर्थ गियर पर दौड़ती नज़र आएगी। मारुति-सुज़ुकी, होंडा,वॉक्सवैगन,फिएट,फोर्ड और टोयोटा जैसी बड़ी कंपनियां बहुत जल्द तकरीबन दर्जन भर से ज्यादा छोटी कारों का जलवा बिखेरने जा रही हैं। फिलहाल छोटी कारों की कीमतों में डिस्काउंट देकर मैन्युफैक्चरर अपने पुराने स्टॉक को खत्म करना चाहते हैं, ताकि नए आने वाले स्टॉक के लिए जगह बनाई जा सके।
इन नई कारों में से ज्यादातर में ऑटमैटिक ड्राइव, एबीएस और एयर बैग्स जैसे लेटेस्ट फीचर्स मौजूद होंगे और इन कारों की कीमत 3 लाख से 5 लाख रुपये के बीच होगी। इन छोटी कारों से 1 लाख की टाटा नैनो शामिल नहीं है। सरकार ने इन कारों में खास छूट का भी प्रावधान किया है, जिसके लिए कुछ खास शर्ते तय की गई हैं। यह छूट पाने के लिए ज़रूरी है कि 4एम मॉडल में स्पोर्ट्स इंजिन हो, जिसमें पेट्रोल वर्जन 1,200 सीसी से कम और डीज़ल वाली कार 1,500 सीसी से कम की हो।ये छोटी कारें दो सालों के भीतर ही भारत की सड़कों पर दौड़ती नज़र आएंगी। इसका साफ मतलब है कि अगर खरीददार कुछ दिन और इंतज़ार करें तो समझिए उनके लिए तोल-मोल करने का बढ़िया वक्त आनेवाला है। जहां मारुति-सुज़ुकी इस साल के अंत तक अपनी सप्लैश लेकर आनेवाली है, वहीं ह्युंदै आई20 लाने की योजना बना रही है। फिएट ग्रैंड पंटो भी इस साल के अंत तक मार्किट में आ जाएगी। टाटा मोटर्स ने भी अपनी कार इंडिका को नए तरीके से पेश करने की योजना बनाई है। ऑटो जगत के कई अन्य खिलाड़ी भी कारों के इस स्मॉल सेगमंट में एंट्री करने जा रहे हैं। इसमें से जो खास हैं, उनमें होंडा, की 'जैज़' और यूरोप की नंबर एक कंपनी वॉक्सवैगन भी 2010 अपनी पॉप्युलर पोलो कॉम्पैक्ट का देसी वर्ज़न मार्किट में उतार रही है।
इतना ही नहीं स्मॉल कार वर्ल्ड में टोयोटा जैसी बड़ी कंपनियां भी अपना हाथ आजमाने जा रही हैं। टोयोटा की ये स्मॉल कार पेट्रोल और डीज़ल दोनों में उपलब्ध होंगी। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि उनकी कंपनी एक से ज्यादा कार भी निकाल सकती है। यही नहीं 2010 के बाद स्कोडा, होंडा और ह्युंदै की एक-एक कार आने वाली है। जेनरल मोटर्स की ओर टाटा की नैनो को टक्कर देने के लिए कम कीमत वाली कार लॉन्च होने वाली है, जिसकी कीमत 2 लाख रुपये होगी।

बच्चे की मौत स्वाभाविक नहीं: डॉक्टर

छिंदवाडा:डॉक्टरों ने संत आसाराम बापू के इंदुमति गुरुकुल आश्रम में वेदांत की मौत को स्वाभाविक नहीं माना है। वेदांत के शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. एस. पी. जैन और डॉ. डी. साकल्ले ने कहा कि वेदांत की मौत स्वभाविक नहीं थी।
उन्होंने कहा कि शव पर किसी भी प्रकार की बाहरी या अंदरुनी चोट के निशान भी नहीं पाए गए हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसे सामान्य मौत नहीं कहा जा सकता लेकिन वास्तविक कारणों का पता विसरा की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही चल सकेगा। वेदांत के पोस्टमॉर्टम के दौरान डा.जैन और साकल्ले के अलावा छिंदवाड़ा के दो चिकित्सक डा पी के श्रीवास्तव और डॉ.के.सी.जैन भी मौजूद थे।

वामपंथी राजनीति के ‘चाणक्य’ थे सुरजीत

01 अगस्त 2008 दिल्ली। वामपंथी राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले हरकिशन सिंह सुरजीत पांच दशकों तक भारतीय राजनीति में छाये रहे। केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को वामपंथी दलों का समर्थन दिलाने तथा 1990 के दशक में भारतीय जनता पार्टी विरोधी कई गठबंधन बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभायी।
आज दिवंगत हुए सुरजीत 92 वर्ष के थे। वह पिछले काफी समय से बीमार थे।
स्वर्गीय सुरजीत 1992 से 2005 तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव तथा 1964 से लेकर 2008 तक पार्टी पोलित ब्यूरों के सदस्य रहे।
पंजाब के जालंधर जिले के बादला में जस्सी जाट परिवार में 23 मार्च 1916 को जन्में सुरजीत ने भगत सिंह के समर्थक के रूप में किशोरवस्था में ही अपने राजनीतिक जीवन की शुरआत की थी। उन्होंने वर्ष 1930 में भगत सिंह की पार्टी नौजवान सभा में शामिल होकर आजादी के आन्दोलन में शिरकत की।
भगत सिंह के शहीदी दिवस की वर्षगांठ पर उन्होंने होशियारपुर की अदालत में तिरंगा फहराया था। तिरंगा फहराने के दौरान उन पर दो बार फायरिंग की गयी। बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें इसके लिए दंडित किया। अदालत में उन्होंने अपना नाम ‘लंदन तोड़ सिंह’ बताया था।
वर्ष 1936 में स्व. सुरजीत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) में शामिल हो गये। वह पंजाब में किसान सभा के सह संस्थापक थे। उन्होंने ‘दुखी दुनिया और चिंगारी’ का प्रकाशन शुरू किया। आजादी की लड़ाई के दौरान वह जेल गये। देश के आजाद होने और 1947 में विभाजन के बाद वह भाकपा की पंजाब इकाई के महासचिव चुने गये।
पढ़ें: माकपा नेता हरकिशन सुरजीत नहीं रहे
स्व. सुरजीत ने वर्ष 1959 में पंजाब में ऐतिहासिक कर विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने किसानों की बेहतरी के लिए बहुत काम किया जिसे देखते हुए उन्हें अखिल भारतीय किसान सभा का महासचिव तथा बाद में इसका अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने कृषि कामगार यूनियन में काम किया। वर्ष 1964 में जब भाकपा का विभाजन हुआ तो सुरजीत ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का साथ दिया। माकपा की पहली पोलित ब्यूरो के नौ सदस्यों में वह एक थे।
स्व. सुरजीत पार्टी में लगातार अपनी पकड़ मजबूत बनाते गये और 1992 में वह पार्टी के महासचिव निर्वाचित हुए तथा वर्ष 2005 तक वह इस पद पर बने रहे। सुरजीत भाजपा और सांप्रदायिकता के कट्टर विरोधी के रूप में जाने जाते थे। केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को वामपंथी दलों का समर्थन दिलाने तथा 1990 के दशक में भाजपा विरोधी कई गठबंधन बनाने में अहम भूमिका निभायी थी।
महासचिव का पद छोड़ने के बाद सुरजीत देश की राजनीति में सक्रिया भूमिका निभाते रहे। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद और 1996-1998 की संयुक्त मोर्चा सरकार के दौरान केन्द्रीय राजनीति में गठबंधनों को बनाने में उन्होंने चाणक्य की भूमिका निभायी।
खराब स्वास्थ्य के कारण सुरजीत को अप्रैल 2008 के माकपा की 19वीं कांग्रेस में पहली बार पार्टी पोलित ब्यूरो में शामिल नहीं किया गया। उन्हें केन्द्रीय समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य का दर्जा दिया गया।