rashtrya ujala

Thursday, March 5, 2009

रंग ही नहीं औषधि भी हैं टेसू के फूल

निर्मेश त्यागी
फाल्गुन का महीना आते ही टेसू के रंग से होली खेलने की तैयारी शुरू हो गई है। आधुनिकता के इस युग में भी ब्रज क्षेत्र में टेसू से होली खेलने की परंपरा है। टेसू के फूल की मांग बढ़ गई है। इस बार कीमतों में कुछ इजाफा हुआ है। रासायनिक रंगों के मुकाबले ये ज्यादा सुरक्षित हैं और त्वचा रोग के लिए औषधितुल्य होते हैं।राधा संग होली खेलते कृष्ण और उन पर बरसते टेसू के रंग जैसी तमाम बातें गीत और कहानियों के माध्यम से मिलती है। बृज क्षेत्र में टेसू के फूलों से भावनात्मक लगाव शायद इसी वजह से है। जमाना बदला तो केमिकल के रंगों की भरमार हो गई है। इसके बाद भी बृज क्षेत्र में होली पर टेसू के रंगों का प्रयोग होता है। परंपरा को आज भी यहां के लोग निभाते है। टेसू के फूल में औषधि के बहुत से गुण है।शहर के दर्जनों व्यापारी ऐसे हैं जो इसका कारोबार बखूबी कर रहे हैं।

टेसू के यह फूल मुख्यत: झांसी, मऊरानीपुर और मध्य प्रदेश के इलाकों से यहां आते हैं। टेसू का फूल असाध्य चर्म रोगों में भी लाभप्रद होता है। हल्के गुनगुने पानी में डालकर सूजन वाली जगह धोने से सूजन समाप्त होती है। होलिका दहन से पांच दिन रंग भरनी एकादशी से ही टेसू के रंगों की जरूरत होती है। इस दिन देवालयों पहुंचने वाले लोगों पर टेसू के रंग की बरसात की जाती है।फर्म पुरुषोत्तम दस मोहन लाल के स्वामी मोहन दास माहेश्वरी का कहना है कि इस बार गर्म मौसम की वजह से फूल की पैदावार पर असर पड़ा है। यही वजह है कि इस बार इसकी कीमत में दो रुपये का इजाफा हुआ है। उनका कहना है कि आधा किलो टेसू के फूल पन्द्रह लीटर पानी में लिए बहुत है।बृज के मथुरा, आगरा, हाथरस, दाऊजी, गोकुल आदि क्षेत्र में इसका जबरदस्त प्रचलन है। नंदगांव बरसाने की लठामार होली हो या फिर दाऊजी का हुरंगा, इनमें टेसू के फूलों का जमकर प्रयोग होता है। बिहारी के मंदिर में खेली जाने वाली होली में भी टेसू के फूलों का प्रचलन है।त्वचा रोग विशेषज्ञ का कहना है कि टेसू के फूल त्वचा रोग में लाभकारी है। कहना है कि टेसू के फूल को घिस कर चिकन पाक्स के रोगियों को लगाया जा सकता है। इससे एलर्जी नहीं होती है जबकि केमिकल वाले रंग-गुलाल त्वचा के लिए हानिकारक है। इनसे शरीर पर जलन होती है।

7 comments:

pankaj vyas said...

aapka yaha jankari vardhak lekha pasand aaya.

ise ratlam, jhabua(M.P.), Dahod(gujarat) se prakashit Dainik Prasaran me prakashit karane ja raha hoon.

kripya, aap pana postal address send karen, taki aapko ek prati bheji ja saken.

pan_vya@yahoo.co.in

शोभा said...

अच्छी जानकारी दी है। होली की शुभकामनाएँ।

P.N. Subramanian said...

ज्ञानवर्धक लेख के लिए आभार.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत अच्छी लगी यह जानकारी ..शुक्रिया

प्रेम said...

"(औषधि स्वरूप प्रयोग होता होगा,) होली का रंग है टेसू का फूल" शीर्षक प्राय: उचित लगता है| आप ने अपनी पोस्ट के शीर्षक के प्रतिकूल टेसू के औषधि के स्वरूप प्रयोग का तो कुछ लिखा ही नहीं| १९४० दशक के दिल्ली में बिरला मंदिर के पीछे रिज पहाड़ी से टेसू के फूलों को ला पानी में उबाल कर होली खेलने के लिए रंग बनाया करते थे| आपने बीते दिनों की याद ताजा कर दी| धन्यवाद|

media point said...

मुझे किसी खरीदार के मोबाइल no चाहिए जो पलास के लाल फूलोबको खरीदे।
9413677900 कमल यदुवंशी। कोटा। राजस्थान

Unknown said...

मुझे भी कोई खरीददार चाहिए