लखनऊ। केंद्र सरकार के खिलाफ अगले तीन माह तक राज्य में बसपा की हुंकार गूंजेगी। इस क्रम में राज्य के एक या दो जिले में हर दिन पार्टी के बड़े नेता देशव्यापी जनहित चेतना आंदोलन के तहत प्रदर्शन में केन्द्र सरकार की असफलताओं का ब्यौरा जनता के बीच रखेंगे। बढ़ती महंगाई के लिए केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहरायेंगे और बसपा प्रमुख के खिलाफ सीबीआई का दुरुपयोग किये जाने के तथ्य जनता के बीच रखते हुए उन्हें दिल्ली की गद्दी पर बिठाने का संकल्प फिर दोहराया जायेगा।बस्ती सहित राज्य के कई जिलों में यह नजारा एक सितम्बर को देखने को मिलेगा। इस दौरान बसपा के नेता और कार्यकर्ता पार्टी के अनुशासन को पूरा ख्याल रखेंगे। पार्टी के नौ अगस्त को यहां हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में बसपा प्रमुख मायावती ने दल के देशव्यापी जनहित आंदोलन की यही रूपरेखा तैयार की थी। जिसके तहत राज्य में एक सितम्बर से 30 सितम्बर के बीच सभी जिला मुख्यालयों पर बड़ा प्रदर्शन कर पार्टी नेताओं को केन्द्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब करना था। इस कार्यक्रम में हर विधानसभा क्षेत्र से आठ से दस हजार लोगों को लाने का लक्ष्य कार्यकर्ताओं को दिया गया। जबकि जोनल कोडिनेटर को ऐसे कार्यक्रमों की अध्यक्षता करने का जिम्मा मिला है। पूरे सितम्बर माह तक राज्य भर में हर दिन किसी न किसी जिले में ऐसे कार्यक्रम होंगे। जिनकी तिथि पार्टी की राज्य इकाई के नेताओं ने तय कर जिले के नेताओं को बता दी है। कहा जा रहा है, इसके तहत लखनऊ में 27 सितम्बर को प्रदर्शन की तिथि तय हुई है।जिला में प्रदर्शन के बाद हर विधानसभा मुख्यालय और फिर राज्य मुख्यालयों पर इसी तर्ज पर नवम्बर तक प्रदर्शन होंगे। बसपा के नेताओं के अनुसार अगले तीन माह तक केन्द्र सरकार के खिलाफ माहौल गरम किया जाता रहेगा। पार्टी के कार्यक्रम में कहीं कोई कमी न रहे इसके लिए हर पार्टी पदाधिकारी को इस आंदोलन को संचालित करने के ब्यौरे वाली पुस्तिका भी दी गयी है जिसमें महंगाई के मुददे पर केन्द्र सरकार की खामियों का उल्लेख किया गया है। साथ ही पुस्तक में तीन महीने के कार्यक्रमों का ब्यौरा भी है। इसमें राज्य सरकार के किन-किन प्रस्तावों पर केन्द्र सरकार ने धन व अन्य मदद देने में कोताही की इस बारे में भी लिखा गया है, जिसके मुताबिक ही पार्टी के नेताओं को केन्द्र सरकार पर हमला करने को कहा गया है। इसके अलावा जनता के बीच में बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ सीबीआई का दुरुपयोग करके उन्हें फंसाने की केन्द्रीय नेताओं की मंशा के बारे में जनता को बताया जायेगा। पार्टी के इस आन्दोलन के दौरान को सफल बनाने के लिए दिये गये निर्देशों का ठीक से पालन हुआ या नहीं? इस पर भी नजर रखने का इन्तजाम किया गया है जिसके चलते पार्टी के हर प्रदर्शन की वीडियोग्राफी कराने को कहा गया है। इससे यह पता लगाया जायेगा कि किस जिसे में सबसे अधिक भीड़ एकत्र करने में पार्टी नेता सफल रहे।
Sunday, August 31, 2008
अपराधियों को सौंपने पर भारत-बांग्लादेश राजी

..जरूरी है नर्व सेल्स का बनते रहना

.तो सौ साल से ज्यादा जी सकेगा इंसान
लंदन। जरा 125 साल की उम्र तक जीवित रहने की कल्पना कीजिए। वह भी स्वस्थ और भले चंगे। हो सकता है यह आपको कल्पना की उड़ान लगे, लेकिन वैज्ञानिक इसे हकीकत बनाने में जुटे हैं। वैज्ञानिकों ने आनुवांशिक गुणों के आधार पर ऐसा उपाय ढूंढ निकालने का दावा किया है जिसकी मदद से न सिर्फ दीर्घायु जीवन संभव हो सकेगा बल्कि कैंसर का खतरा भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा।मैड्रिड स्थित स्पेन के राष्ट्रीय कैंसर शोध केंद्र के वैज्ञानिकों का दल चूहों पर किए प्रयोगों के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि चूहों की आयु न सिर्फ 45 फीसदी तक बढ़ गई बल्कि वे ट्यूमर मुक्त भी रहे। शोध के मुताबिक यदि यह प्रयोग इंसानों पर किया जाए तो उसकी आयु भी बढ़ जाएगी। क्योंकि आयु बढ़ाने वाला जीन चूहों और इंसान में एक ही तरह से काम करता है।डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट में शोध दल के प्रमुख वैज्ञानिक मारिया ब्लास्को के हवाले से कहा गया है कि इंसान अब 125 साल तक जी सकता है और वह भी बिना कैंसर के। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने टेलोमेरास, पी 53 और पी 16 नाम के तीन जीन की अतिरिक्त प्रति चूहों की स्टेम सेल में डाल दी। तीनों जीन लंबी आयु और ट्यूमर की वृद्धि रोकने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनकी अतिरिक्त प्रति डाल देने से शरीर में अधिक प्रोटीन बनाने लगा और ये अधिक सक्रिय हो गए। इसकी वजह से क्रोमोसोम का सिकुड़ना बंद हो गया। यही वह प्रक्रिया है जो किसी जीव या आदमी की उम्र बढ़ने के दौरान होती है। इसका अर्थ हुआ कि पी 53 और पी 16 मिलकर कोशिकाओं को उत्परिवर्तित होने और विभाजित होने से रोकते हैं। इस तरह ये कैंसर या ट्यूमर से बचाव में भी कारगर होते हैं।
Saturday, August 30, 2008
ग़रीबी के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा अभियान
![]() | ![]() लुला दा सिल्वा से लोगों को बहुत उम्मीदें हैं |
35 करोड़ बच्चे बेहद ग़रीब
![]() | ![]() एशिया में 35 करोड़ से ज़्यादा बच्चे घोर ग़रीबी में जी रहे हैं. |
'विकास के फ़ायदे ग़रीबों तक नहीं'
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'भारत और चीन विलेन'अर्थशास्त्री और सोनिया गाँधी की राष्ट्रीय सलाहकार समिति के अध्यक्ष जयराम रमेश का कहना है कि इस रिपोर्ट को ग़ौर से देखें तो पता चलता है कि बांग्लादेश इसका हीरो है और भारत और चीन विलेन यानी खलनायक हैं.
![]() | ![]() ![]() जयराम रमेश, प्रमुख अर्थशास्त्री |
जयराम रमेश का मानना है कि भारत और चीन की जो वृद्धि दर है, उसके अनुरूप उनके मानव विकास सूचकांक नहीं है.कहा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र विकास रिपोर्ट का यह संस्करण पिछले संस्करणों में ज़्यादा व्यापक है और इसमें जीवन के तमाम पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया गया है.लेकिन इस रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में कर, राजस्व का सिर्फ़ 10 फ़ीसदी है और यह पिछले 20 वर्षों में नहीं बढ़ा है.विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार को ग़ैरसरकारी संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है. साथ ही व्यवस्था का फ़ायदा ज़मीनी स्तर तक पहुँचाना बेहद ज़रूरी है.संयुक्त राष्ट्र विकास रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊँची आर्थिक बढ़त दर के फ़ायदे अभी भारत के ग़रीबों या आम आदमी तक नहीं पहुँच पाए हैं.
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर घटी
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कृषि के साथ-साथ अनेक क्षेत्रों की विकास दर पिछले साल के मुकाबले में और सुस्त रही है |
कई क्षेत्रों में धीमी विकास दर:भारत सरकार के केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2006-07 में भारत की सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 9.6 प्रतिशत थी जो पिछले 18 साल में सबसे ज़्यादा थी.
![]() ![]() सरकार से जुड़े एक अर्थशास्त्री |
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य सौमेत्र चौधरी ने कहा है, "इन आँकड़ों से कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. जब आप वित्तीय स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश करते है तो विकास दर घटती ही है. लेकिन विकास दर बहुत ज़्यादा नहीं गिरी है क्योंकि पीछे का इतिहास देखा जाए तो 7.9 की विकास दर काफ़ी ऊँची है."निर्माण क्षेत्र की विकास दर लगभग आधी होकर 5.6 प्रतिशत हो गई जबकि इससे पहले ये 10.9 प्रतिशत थी.11.8 प्रतिशत और बिजली क्षेत्र में विकास दर 7.3 प्रतिशत थी.कृषि और संबंधित क्षेत्रों में विकास दर पिछले साल के 4.4 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत रह गई.बिजली, गैस और पानी की सप्लाई अन्य प्रमुख क्षेत्र है जिनकी विकास दर में कमी आई है. पहले ये 7.9 प्रतिशत थी और अब ये घटकर 2.6 प्रतिशत हो गई है.सेवा क्षेत्र, होटल, यातायात और संचार सेवाओं की विकास दर ज़्यादा नहीं घटी और ये पिछले साल के 13.1 के मुकाबले में 11.2 प्रतिशत थी.वित्तीय क्षेत्र, बीमा, व्यावसायिक सेवाओं की विकास दर 12.6 प्रतिशत के घट कर 9.3 प्रतिशत हो गई है.
के. के. बिड़ला का निधन
हिन्दुस्तान टाइम्स और बिड़ला समूह के अनेक उद्योगों के अध्यक्ष बिड़ला के परिवार में उनकी 3 बेटियां नंदिनी नुपानी, शोभना भरतिया और सरोज पोतदार हैं। शोभना भरतिया हिन्दुस्तान टाइम्स की संपादकीय सलाहकार हैं।
के। के. बिड़ला की पत्नी मनोरमा देवी बिड़ला का एक महीना पहले निधन हो गया था।
उद्योगपति के अलावा भी बहुत कुछ थे के। के. बिड़ला
कोलकाता : के. के. बाबू के रूप में मशहूर कृष्ण कुमार बिड़ला न सिर्फ एक बड़े उद्योगपति थे, बल्कि मॉर्डन संस्थानों के निर्माण में भी उन्होंने काफी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने पैतृक स्थान पिलानी (राजस्थान) में बिड़ला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी की स्थापना की। आज इसकी शाखाएं पूरे देश में फैली हैं।
उनका जन्म 11 नवंबर 1918 को हुआ था। उनके पिता घनश्याम दास बिड़ला आजादी के लड़ाई के दौरान कांग्रेस के सपोर्टर और गांधी जी के करीबियों में शामिल थे। उनकी उच्च शिक्षा कोलकाता, दिल्ली और पंजाब यूनिवर्सिटी से हुई । वह 1984 से 2000 तक लगातार राज्यसभा के सदस्य भी रहे और इस दौरान संसद की कई समितियों की अध्यक्षता की। वह बिड़ला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी के चांसलर और हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप के चेयरमैन भी थे। .
इसके अलावा उन्होंने कई किताबें भी लिखीं। इसमें एक किताब इंदिरा गांधी पर भी लिखी गई। उन्होंने के। के. बिड़ला फाउंडेशन की स्थापना भी की, जो भारतीय साहित्य, रिसर्च, आर्ट और कल्चर के लिए लोगों को अवॉर्ड भी देता है।
दलितों का ईसाईकरण है कंधमाल झगड़े की जड़
कंधमाल । उड़ीसा के आदिवासी जिलों में फिलहाल दिख रही शांति और खामोशी की राख के नीचे आक्रोश की आग बदस्तूर सुलग रही है। हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। प्रशासन की कोई भी चूक चिनगारी भड़का सकती है।अल्पसंख्यकों को पुचकारने के लिए जहां सरकार ने राहत शिविर शुरू किए हैं, वहीं संघ से जुड़े कार्यकर्ता पुलिस की धरपकड़ से बचने के लिए भागते फिर रहे हैं। नफरत की आग शहर व कस्बों के रास्ते गांवों तक पहुंच गई है।जनजातीय 'कांध' और दलित 'पाण' के बीच का विवाद ईसाईकरण के चलते खूनी रंजिश में तब्दील हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि बेहद शांत और भोली-भाली आबादी वाले इस इलाके में धर्म और जाति के नाम पर कोई नफरत नहीं है। झगड़े की वजह है छोटे-छोटे लालच देकर किया जाने वाला ईसाईकरण।
बिखरता ताना-बाना
एक ओर भारतीय संस्कृति और धर्म को संरक्षित करने के साथ स्थानीय लोगों को जागरूक बनाने का दायित्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उठा रखा है, तो दूसरी ओर भोले-भाले वनवासियों को बाइबिल की महिमा बताई जा रही है और उन्हें सुखी व संपन्न बनाने का सपना दिखाया जा रहा है। इसी के सहारे धर्मातरण अभियान चल रहा है।उड़ीसा में धर्मातरण कानून सम्मत नहीं है। गोरक्षा कानून के बावजूद गोवध हो रहा है। टूट रहे इस सामाजिक ताने-बाने की चटक से कंधमाल थर्रा उठा है। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती कई दशक से यहां के लोगों के बीच उनके आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उत्थान के लिए काम कर रहे थे। यहां के लोगों के लिए वह किसी भगवान से कम नहीं थे।23 अगस्त को उनकी हत्या के बाद अगले दिन उनकी शवयात्रा में उमड़ा लोगों का सैलाब उनकी लोकप्रियता का सुबूत था। सुबह निकली चार किलोमीटर लंबी शवयात्रा अपने गंतव्य पर 48 घंटे बाद पहुंची थी।
अंधाधुंध धर्मातरण:दरअसल, उड़ीसा के कंधमाल और आसपास के जिलों में 'कांध' नाम की जनजाति और 'पाण' नाम के दलितों के बीच विवाद पुराना है। पाण जातियों का ईसाईकरण बेहद आसानी से होता है, जबकि कांधों को ईसाईकरण फूटी आंख नहीं सुहाता। संबलपुर कैथोलिक चर्च के उपाध्यक्ष फादर अल्फांस टोपो के अनुसार कंधमाल में ईसाइयों की संख्या साढ़े छह लाख पहुंच गई है। वहीं कंधमाल जनजातियों का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है, जो हिंदू धर्म के पक्के समर्थक हैं। इनके हितों की पैरवी संघ परिवार करता है। कानूनसम्मत तरीके से 1967 से अब तक सिर्फ तीन लोग ईसाई बने हैं।
नाराजगी की खास वजह:कांधों की नाराजगी की एक खास वजह यह है कि ईसाई बने लोग दलितों को मिलने वाली सहूलियतें भी लेते हैं। कांधों को लगता है कि उनके आरक्षण कोटे में पाण की सेंध अनुचित है। मुश्किल यह है कि सरकारी दस्तावेजों में पाण आज भी दलित हैं। आधिकारिक तौर पर उन्हें ईसाई नहीं माना गया है। यह सरकारी चूक विवाद को भड़काने में घी का काम कर रही है। इसे लेकर कट्टरपंथी ईसाई और हिंदुओं में उबाल है जो गाहे-बगाहे हिंसा का रूप ले लेता है।उड़ीसा में धर्मातरण विरोधी कानून की कहानी भी खूब है। कानून तो है, पर अमल नहीं होता। एकाध बार कानून पर अमल किया भी गया तो अमल कराने वाले सरकारी अफसर को ही दंडित कर दिया गया। लिहाजा कभी किसी जिला प्रशासन ने अमल करने की हिम्मत नहीं जुटाई।यह कानून राज्य में पहली बार 1967 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजेंद्र नारायण सिंह देव के कार्यकाल में बना। कानून की अवहेलना करने वाले को कैद और जुर्माना लगाने का प्रावधान था। अगर अनुसूचित जाति अथवा जनजाति के व्यक्ति का धर्मातरण किया गया तो दंड दोगुना देना होगा। मामले की जांच भी आला अफसर के हाथ सौंपे जाने का प्रावधान था। कानून के तहत पुजारी या पादरी को धर्मातरण समारोह की सूचना और विस्तृत जानकारी जिला प्रशासन को 15 दिन पहले देने का भी प्रावधान किया गया। लेकिन यह कानून कभी ढंग से लागू ही नहीं हुआ। 22 साल बाद राज्य सरकार की नींद खुली और 1989 में संशोधन किया गया।नवरंगपुर के तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक ने 22 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तो उन्हें दंडित करते हुए उनका तबादला कर दिया गया। तब से आज तक उस कानून के आधार पर केवल तीन लोगों का अधिकृत धर्म परिवर्तन हुआ है।
सड़कों पर रोज फट रहे हैं सैकड़ों बम
नई दिल्ली। देश की सड़कों पर रोज सैकड़ों बम फट रहे हैं लेकिन बे-आवाज। ये बम आतंकियों ने नहीं बिछाए हैं, पर जान-माल के नुकसान के लिहाज से ये आतंकी हमले से भी ज्यादा खतरनाक हैं। हम बात कर रहे हैं सड़कों पर रोज होने वाले हादसों की। यह कम चौंकाने वाली बात नहीं है कि बीते साल इन सड़क हादसों में करीब एक लाख जानें गई।देश की बढ़ती समृद्धि में दाग लगाने वाले सड़क हादसों में तेजी से इजाफा हो रहा है। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक रोज औसतन 275 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं। समृद्धि के साथ वाहनों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। वाहनों की तादाद के लिहाज से देखें तो सड़कें सिमटती जा रही हैं। सड़क पर सुरक्षा को लेकर भी गंभीरता न के बराबर है। ये सभी बातें मिल कर सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से ऊपर ले जा रही हैं। आटो कार पत्रिका के संपादक होरमुज सोराबजी कहते हैं कि सड़क सुरक्षा का आलम यह है कि हेलमेट पहनना और सीट बेल्ट बांधना आज भी कुछ बड़े शहरों में ही बाध्यता है। ऐसे में दूसरे उपायों की चर्चा ही बेमानी है।सड़क हादसों में केवल जनहानि ही नहीं होती, विकास पर भी भारी मार पड़ती है। दिल्ली में विश्व बैंक के एक अधिकारी और परिवहन विशेषज्ञ राजेश राहेतगी के अनुसार सड़क हादसों से जो नुकसान होता है, वह जीडीपी का तीन फीसदी तक पहुंच चुका है। बीते साल यह राशि लगभग एक खरब डालर थी। विश्व बैंक का तो दावा है कि सड़क दुर्घटनाएं किसी भी महामारी से ज्यादा नुकसानदेह हैं।सरकार की योजना अगले पांच सालों में सड़कों सहित अवस्थापना सुविधाओं पर पांच सौ अरब रुपये खर्च करने की है। मगर सवाल वही है कि क्या सरकारी तंत्र से लेकर निर्माण एजेंसियों तक फैला भ्रष्टाचार सड़कों की दशा में कोई बड़ा सुधार आने देगा?
Thursday, August 28, 2008
सावधान.. छिपाकर रखें क्रेडिट कार्ड
मुंबई. क्या आपने वीकएंड की खरीदी और रेस्टोरेंट में किए जाने वाले डिनर के भुगतान के लिए नकद का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है? क्या आप हर बिल के भुगतान में क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं? इन प्रश्नों का उत्तर यदि हां है तो सावधान हो जाएं । विक्रेता जो आपका कार्ड स्वाइप करता है, वह उसका क्लोन कार्ड बना सकता है।
कैसे बनता है क्लोन: मूल कार्ड का क्लोन स्किमर नामक उपकरण में कार्ड को स्वाइप करके बनाया जाता है। इसके जरिए कार्ड के मैग्नेटिक टेप में संग्रहीत सभी जानकारियां निकाली जा सकती हैं।कुछ ऐसी ही घटना मुंबई में रोहन और सरिता जोशी के साथ घटी। सरिता को एक दिन सिटी बैंक से एक एसएमएस मिला। इस एसएमएस में उनसे पूछा गया था कि क्या उन्होंने एक दिन पहले दिल्ली में सिटी बैंक के क्रेडिट कार्ड से 2.82 लाख रुपए का कोई बड़ा लेनदेन किया है?सरिता ने पिछली बार अपने कार्ड का इस्तेमाल एक माह से भी अधिक समय पहले तब किया था, जब वे विदेश जा रही थीं। यह कार्ड उनके पति के क्रेडिट कार्ड का एड-ऑन कार्ड था। बाद में कॉल सेंटर की अटेंडेंट ने उन्हें उनके कार्ड के पांच बड़े लेन-देन की जानकारी भी दी।इस जानकारी से सरिता सकते में आ र्गई। उन्होंने इन लेन-देन को नकारते हुए कार्ड को तुरंत ब्लॉक करने को कहा। उन्हें बताया गया कि दिल्ली के बाहरी इलाकों में स्थित तीन विक्रेताओं ने आठ बार 29 हजार से 41 हजार रुपए के बीच लेनदेन किया था।सरिता और उनके पति को न सिर्फ पुलिस स्टेशन के कई चक्कर लगाने पड़े, बल्कि बैंक में अधिकारियों के फोन भी झेलने पड़े। यहां तक कि सरिता ने सिटीग्रुप के भारत में सीईओ संजय नायर को ई-मेल भी भेजा। बैंक की जांच में 2.82 लाख रुपए के लेनदेन की धोखाधड़ी सामने आई। बैंक ने सरिता को बताया कि धोखे से उनके कार्ड की जानकारी चुराई गई थी। हालांकि बाद में बैंक ने उन्हें देनदारी से मुक्त कर दिया।
क्या है स्किमिंग: कार्ड का क्लोन बनाए जाने की प्रक्रिया को स्किमिंग कहा जाता है। क्रेडिट कार्ड को स्किमर नामक डिवाइस में स्वाइप कर जालसाज मैग्नेटिक पट्टी में स्टोर सभी जानकारियां चुरा लेता है। इससे जाली कार्ड तैयार कर लिया जाता है। क्लोन कार्ड को पूरी दुनिया में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- समीर नेमवारकर, वाइस प्रेसीडेंट, हेड ऑफ कार्डस, एक्सिस बैंक
॥ताकि धोखा न हो
>> कार्ड को कभी अपनी नजरों से दूर न होने दें।
>> सुनिश्चित करें कि विक्रेता आपके कार्ड को बैंक की मशीन पर ही स्वाइप कर रहा है, स्किमर पर नहीं।
>> कभी भी पुरानी रिसीट्स और बैंक स्टेटमेंट को सार्वजनिक जगहों पर न फेंकें।
>> अगर इन्हें फेंकना ही हो तो पहले कार्ड नंबर या खाता नंबर की जानकारी नष्ट कर देना चाहिए।
कंधमाल में देखते ही गोली मारने के आदेश
उड़ीसा. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती व उनके चार अनुयायियों की हत्या के बाद सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलसते उड़ीसा के कंधमाल जिले में प्रशासन ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं।इस बीच, राज्य भाजपा ने जहां केंद्रीय नेतृत्व को नवीन पटनायक सरकार से समर्थन वापस लेने की सलाह दी है, वहीं कांग्रेस ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग रखी है।उड़ीसा में हालात बेकाबू होते देख केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल स्थिति की समीक्षा के लिए बुधवार को कंधमाल पहुंचे। जायसवाल ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार राज्य में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात करने के लिए भी तैयार है।
कर्फ़्यू का उल्लंघन :राजस्व विभाग के डिवीजनल कमिश्नर (दक्षिणी डिवीजन) सत्यव्रत साहू ने फोन पर बताया, ‘बालीगुडा और उदयगिरि में कई स्थानों पर लाठियों व देशी हथियारों से लैस भीड़ ने कफ्यरू तोड़कर हिंसा और लूटपाट की कोशिश की। इसे देखते हुए प्रशासन ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं।’
दो घायल :साहू ने बताया कि बुधवार को रैकिया इलाके में भीड़ ने हमला कर दो व्यक्तियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। भीड़ ने राज्य के पूर्व डीजीपी के मकान पर भी हमला किया। रैकिया के कई परिवारों ने जंगलों में शरण ले रखी है।
गठबंधन में दरार :लैकेरा से भाजपा विधायक वृंदावन मांझी ने कहा कि उन्होंने सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। राज्य में भाजपा के तीन मंत्री और चार विधायक राज्य सरकार से समर्थन वापसी की मांग पर केंद्र के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
विपक्ष का आरोप :कंधमाल में जारी हिंसा का प्रभाव राज्य विधानसभा की कार्रवाई पर भी पड़ा है। इस मामले पर बुधवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दल कांग्रेस का आरोप था कि बीजद और भाजपा गठबंधन की सरकार राज्य में स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रही है। कांग्रेस ने सरकार से इस्तीफे की मांग करते हुए राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।‘यद्यपि कंधमाल में तनाव व्याप्त है। फिर भी कुछ इलाकों में हालत धीरे-धीरे सुधर रही है। सुरक्षाकर्मी दुर्गम इलाकों में भी पहुंच गए हैं और तनाव कम करने का प्रयास कर रहे हैं।’ - आरपी कोचे, डीआईजी
बिहार पर 'मन' द्रवित .
कोसी के कहर से बिहार में मचे कोहराम को राष्ट्रीय आपादा करार देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बचाव और राहत कार्य के लिए 1,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। | |||
इसके अलावा मौजूदा स्थितियों से निपटने के लिए 1.25 लाख टन अनाज की तत्काल सहायता देने की घोषणा की, जबकि बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलकर एक लाख टन अनाज की मांग की थी।प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री बाढ़ पीड़ितों की स्थिति को देखकर द्रवित हो गए और कहा कि बिहार की स्थिति बेहद चिंताजनक है और तत्काल राहत देना हमारा कर्तव्य है। अगर जरूरत पड़ी केंद्र राज्य को और राशि मुहैया कराएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इस कोसी के तटबंध टूटने से आई बाढ़ से निबटने और नेपाल से इस मुद्दे पर बात करने के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की योजना बनाई जा रही है। बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने मनमोहन सिंह और संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी वायुसेना के हेलिकॉप्टर से सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया।उनके साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, गृह मंत्री शिवराज पाटिल, लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान, रेल मंत्री लालू प्रसाद, जल संसाधन राज्य मंत्री जयप्रकाश यादव भी थे। हवाई सर्वेक्षण के बाद सिंह ने बिहार को इस स्थिति से निपटने के लिए हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है।उधर, बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए विशेष रिलीफ ट्रेनें भी गुरुवार से चलाने की घोषणा की गई है। पूर्व मध्यरेल के महाप्रबंधक गिरीश भटनागर ने बताया कि पीड़ितों की मदद के लिए रेलमंत्री राहत कोष से कपड़ा, चूड़ा-गुड़, माचिस और अन्य जरूरी सामान मुहैया कराया जा रहा है। बाढ़ से तबाही का मंजर
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धोनी बने दुनिया के नंबर वन बल्लेबाज़
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अच्छीमहेंद्र सिंह धोनी ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ बल्लेबाज़ी की है |
Wednesday, August 27, 2008
वाहन लुटेरों के इंटर स्टेट गैंग का पर्दाफाश
गिरोह के सदस्य राजस्थान के अलवर व भरतपुर जिले की वीइकल रजिस्ट्रेशन ऑथॉरिटी के फर्जी दस्तावेज तैयार कर गाडि़यों की फर्जी आरसी बनवाते और फिर उन्हें लगे हाथ दूसरे जिलों में बेच दिया करते थे। गिरोह का सरगना नंदकिशोर उर्फ नरेंद्र अभी फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। सीआईए सेकंड स्टाफ ऑफिस में आयोजित प्रेस कॉन्फ़रन्स में डीसीपी क्राइम सत्येंद गुप्ता ने कहा कि 21 अगस्त को सोहना थाना पुलिस ने चोरी की इनोवा के साथ अलवर जिले के थाना गाजी इलाके के श्योदान, धर्म सिंह और विमल कुमार को गिरफ्तार किया था। सीआईए स्टाफ ने इन तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की, तो पता चला कि इनका इंटर स्टेट गैंग है। पूछताछ में इन लोगों ने वाहन लूट व चोरी की 18 वारदातें कबूली। इनके बताए गए ठिकानों से पुलिस ने 11 बुलेरो, दो टाटा सफारी, एक ह्युंदै एसेंट, एक स्कॉर्पियो, एक सैंट्रो, एक इंडिका व एक इनोवा सहित 18 लग्ज़री वीइकल बरामद किए हैं। इन वीइकलों में से सात गुड़गांव, तीन दिल्ली, एक आगरा व एक जयपुर से चोरी या लूटे गए थे।
ये तमाम गाडि़यां पुलिस ने हिसार, सिरसा, तोशाम (भिवानी) से बरामद की, जहां इन लोगों ने नंबर व आरसी बदलकर लोगों को बेची थी। डीसीपी गुप्ता ने कहा कि भरतपुर व अलवर से जारी किए गए वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकट की भी जांच की जाएगी, क्योंकि इस फर्जी काम में वीइकल रजिस्ट्रेशन ऑथॉरिटी के कर्मियों की मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। डीसीपी क्राइम ने बताया कि इस गिरोह का वारदात को अंजाम देने का तरीका आम था। ये लोग वीइकल को मौका पाकर पल भर में लेकर फरार हो जाते थे। इस गैंग के सरगना के भाई का भी अपराध से गहरा नाता बताया गया है। नीटू गहलोत मर्डर केस में भी उसके हाथ होने की संभावना है लेकिन अभी पुलिस उस बारे में जांच कर रही है।
सरपंच रह चुका है गैंग लीडर
इस इंटर स्टेट गैंग का लीडर नंदकिशोर उर्फ नरेंद्र अलवर के गांव भगत का बास का रहने वाला है। खास बात यह है कि करीब एक साल से सक्रिय गैंग का लीडर अपने गांव का सरपंच भी रह चुका है। नंदकिशोर अलवर में ही एक राजस्थान पुलिस के एक कर्मी के मकान में किराए पर रह रहा था। अपने साथियों के अरेस्ट की खबर पाने के बाद वह वहां से भी फरार हो गया।
डिमांड और महंगे शौक ने बनाया लुटेरा
गाजियाबाद : लिफ्ट का झांसा देकर यात्रियों को लूटने वाले चार बदमाशों को लिंक रोड पुलिस ने अरेस्ट किया है। उनके पास से पुलिस ने लूटे गए मोबाइल फोन, सोने की चेन और दो कारें बरामद की हैं। पकड़े गए चारों बदमाश स्टूडेंट हैं और अपने महंगे शौक और गर्ल फ्रेंड्स की डिमांड को पूरा करने के लिए अपराध का रास्ता चुन लिया था।
एसएसपी दीपक रतन ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 23 अगस्त को एमिटी में पढ़ने वाले एक स्टूडेंट अमन जौली ने लिंक रोड पुलिस से शिकायत की कि एक लाल रंग की स्विफ्ट कार में सवार चार युवकों ने मेरठ तक लिफ्ट देने के बहाने हथियारों के बल पर उससे दो मोबाइल फोन और 500 रुपये लूट लिए। इसके अतिरिक्त कई और स्थानों पर भी लूटपाट की वारदात की सूचना पुलिस को मिल चुकी थी। इसके आधार पर लिंक रोड पुलिस को जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान मोदीनगर में रहने वाले अजय शर्मा ने पुलिस को बताया कि 3 अगस्त को लाल रंग की स्विफ्ट कार में सवार युवकों ने लिफ्ट देने के बहाने उससे मोबाइल फोन, सोने की चेन और 30 हजार रुपये की नकदी लूटने वाले एक व्यक्ति का उसे फोन नंबर मिल गया है। लुटेरे उसे पुलिस से शिकायत न करने के एवज में लूटा गया माल लौटाने के लिए तैयार है। इस आधार पर पुलिस ने प्लानिंग के तहत अजय से कहकर उन चारों बदमाशों को बीईएल चौराहे के निकट बुला लिया। जैसे ही ये बदमाश स्विफ्ट और एसेंट कार में आए, वैसे ही पुलिस ने घेरा डालकर उन्हें दबोच लिया। चारों युवक इंटर पास आउट स्टूडेंट हैं। इनमें नरवीर यादव का पिता कल्याणपुरी थाने में हेडकॉन्स्टेबल है। उसने बताया कि अपराध की लाइन में आने से पहले गौरव वर्मा प्रॉपर्टी का कारोबार, नासिर एलआईसी और फरीद फर्नीचर का कारोबार करता था। लेकिन शाही खर्च और गर्ल फ्रेंड्स की डिमांड को पूरा करने के लिए उन्होंने अपराध का रास्ता चुन लिया। चूंकि गौरव के पास अपनी स्विफ्ट कार थी और एक एसेंट उन्होंने वसंत विहार दिल्ली से चुराई थी, इसीलिए उन्होंने देर शाम को बस अड्डे के निकट सवारी का इंतजार करने वाले यात्रियों को लिफ्ट दे लूटने की वारदात करना शुरू कर दिया। पकड़े गए बदमाशों ने दिल्ली और गाजियाबाद में कई आपराधिक वारदात में अपना हाथ होना स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को अभी इन चारों बदमाशों के दूसरे साथियों के बारे में भी पता लगा है।
नाबालिग को पेड़ से बांधकर किया गैंग रेप
वड़ोदरा: गुजरात के नर्मदा जिले के मोती भामरी गांव के पास एक 17 साल की लड़की को पेड़ से बांधकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। पीड़ित लड़की के पिता द्वारा दर्ज शिकायत में कहा गया है कि एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर सहित पांच लोगों ने 21 अगस्त को लड़की का अपहरण किया और पास के जंगल में उसके साथ रेप किया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों में से एक ने किडनैपिंग से पहले पीड़िता के साथ शादी करने का वादा किया था। रेप करने के बाद आरोपी लड़की को गांव के बाहर छोड़ गए। पुलिस ने बताया कि एक सिटी हॉस्पिटल में पीड़िता का इलाज किया जा रहा है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
'हमारे पैरंट्स ही हमें मार डालेंगे'
गाजियाबाद: इंस्टिट्यूट में पढ़ाई के दौरान लव और फिर मैरिज करने वाले युवक-युवती ने आरोप लगया है कि युवती के मां-बाप उनके बाधा बन रहे हैं। शादी के तीन महीने बाद सोमवार को नवदंपती एसपी सिटी से मिलने उनके ऑफिस पहुंचे और बोले - 'हमारी जान मां-बाप से बचाओ, वह हमें मार डालेंगे।' कपल ने अपनी मैरिज सर्टिफिकेट भी उन्हें दिखाया। एसपी सिटी ने उन्हें कानून के अनुसार हेल्प करने का आश्वासन दिया।
राजनगर में रहने वाले अनुज (काल्पिनक नाम) और निशा (काल्पिनक नाम) सिटी के एक इंस्टिट्यूट में साथ-साथ पढ़ते थे। इसी दौरान दोनों का प्यार परवान चढ़ा। इस बीच युवती के पिता का लखनऊ में ट्रांसफर हो गया और युवती की फैमिली लखनऊ चली गई। इसके बाद भी अनुज अक्सर लखनऊ निशा से मिलने पहुंच जाता था। इस तरहे वे चोरी-छिपे मिलते रहते थे। बताया गया है कि कई साल तक मोहब्बत परवान चढ़ने के बाद आखिरकार तीन महीने पूर्व निशा अपने घर लखनऊ से गाजियाबाद आ गई और उसने अनुज से विवाह रचा लिया। उनके विवाह की जानकारी अनुज की फैमिली को थी, परंतु निशा के घर पर किसी को भनक तक नहीं लगी। विवाह के बाद दोनों एक माह तक इधर-उधर घूमते रहे। इधर निशा के घर से गायब होने के बाद जब उसके पिता को पता लगा कि निशा ने विवाह कर लिया है तो वह अनुज की जान के दुश्मन गए। सोमवार को एसपी सिटी ऑफिस में पहुंचे अनुज और निशा ने बताया कि वह पिछले तीन माह से डर कर इधर-उधर भाग रहे हैं। उन्होंने विवाह के बाद कोर्ट मैरिज का सर्टिफिकेट भी एसपी को दिखाया। उन्होंने बताया कि निशा के मां-बाप उन्हें मार डालेंगे हमारी जान बचाओ। एसपी ने उन्होंने हेल्प का आश्वासन दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
आशियां बनाने के लिए लोन लिया, पहुंचे जेल
नोएडा: ' हेलो, आपके लिए होम लोन का एक बढि़या ऑफर है। बहुत ही आसान तरीके से आपको लोन मिल जाएगा। इसके लिए आपको बस कुछ ही कागजात देने होंगे। ....' अगर इस तरह आपको कॉल कर कोई होम लोन दिलाने या फिर किसी भी तरह का लोन दिलाने की बात कर रहा हो, तो आप सावधान हो जाएं। हो सकता है कि कोई जालसाज किसी बैंक से लोन दिलाने के नाम पर आपको अपने जाल में फंसा रहा हो।
नोएडा के चौड़ा गांव में रहने वाले मिल्क मैन रणजीत सिंह को जालसाजों ने इसी तरहअपने जाल में फंसा लिया और उनकी कीमती जमीन के रजिस्ट्री कागजात समेत, एक ब्लैंक चेक और अन्य कई महत्वपूर्ण कागज लेने के बाद एक बैंक का फर्जी चेक पकड़ा दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि जालसाजों ने लोन के नाम पर उन्हें पंजाब नैशनल बैंक के नकली चेक का इस्तेमाल कर 37.54 लाख रुपये का चेक दे दिया। जब वह चेक लेकर बैंक पहुंचे, तो बैंक अधिकारियों ने नकली चेक देखते ही पुलिस को सूचना दे दी और उनके खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। अब पुलिस मिल्क मैन को हिरासत में लेकर पूछताछ के आधार पर धोखाधड़ी करने वालों के बारे में पता लगा रही है।
मिल्क मैन रणजीत सिंह अब यह सोचकर परेशान हैं कि कहीं जालसाज उनकी जमीन की रजिस्ट्री के कागजात का दुरुपयोग न करें। रजिस्ट्री कागज के अलावा बदमाशों ने बिजली बिल, फोन बिल समेत उनकी फोटो और एक बैंक का ब्लैंक चेक भी लिया है। इससे उन्हें इस बात की आशंका है कि कागजों का दुरुपयोग कर जालसाज उन्हें किसी बड़ी मुसीबत में न फंसा दे। रणजीत ने बताया कि करीब 14 दिन पहले संतोष श्रीवास्तव नामक युवक ने फोन कर होम लोन दिलवाने की बात कही थी। घर बनवाने और दो बड़ी बेटियों की शादी करने का सपना लिए रणजीत सिंह ने लोन लेने के लिए तुरंत हामी भर दी। अगले ही दिन वह युवक अपने एक और साथी को लेकर घर पहुंचा और सभी डॉक्युमेंट चेक किए। उन्होंने बताया कि सभी कागजात लेने के बाद 23 अगस्त को दोनों जालसाजों ने 37.54 लाख रुपये का चेक दे दिया। उस चेक को लेकर सोमवार को जब वह सेक्टर-27 स्थित बैंक पहुंचे, तो बैंक अधिकारियों ने चेक को फर्जी करार दिया। यही नहीं, बैंक अधिकारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी और रणजीत को उनके हवाले कर दिया। बैंक अधिकारी ए. के. शर्मा ने बताया कि ओरिजिनल चेक की डुप्लिकेट कॉपी का यूज़ किया गया है। अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर अनिल समानिया ने बताया कि अब तक की जांच में यह सामने आया है कि रणजीत सिंह जालसाजों का शिकार बने हैं। उन्होंने बताया कि दोनों जालसाजों के बारे में पता लगाने के लिए एक पुलिस टीम जुटी हुई है।
उत्तर बिहार में बाढ़ से 52 लोगों की मौत
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी गुरुवार को बिहार के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। लेकिन अभी उनकी यात्रा का समय तय नहीं हुआ है। बाढ़ के कारण राज्य के करीब 30 लाख लोग प्रभावित हैं और 400 से अधिक गांव बुरी तरह डूब गए है। कोसी नदी का तटबंध टूटने और नदी की धारा बदलने से ऐसी बाढ़ राज्य में अभी तक नहीं आई थी। नौका दुर्घटना और अन्य घटनाओं में मधेपुरा में 25, सुपौल में 10, भागलपुर में 7, पश्चिम चंपारण के बगहा में 4, पूर्णिया और समस्तीपुर में तीन - तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
सुपौल से मिली रिपोर्ट के अनुसार पिछले सोमवार को कुसहा के निकट कोसी के बांध के टूटने से जिले के छातापुर , त्रिवेनीगंज , राघोपुर , प्रतापगंज , वंसतपुर , निर्मली , मरौना , सरायगढ़ और किशनपुर ब्लॉक के करीब 300 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। सेना के हेलिकॉप्टरों की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में फुड पैकेट्स और पॉलिथीन सीट्स तथा अन्य जरूरी सामग्रिया गिराई जा रही हैं। इसके अलावा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा बड़ी संख्या में नावें चलाई जा रही हैं।
सहरसा में सोनवर्षा , पतरघट , सौरबाज़ार के 25 पंचायतों की करीब 3 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में है। बाढ़ के कारण पतरघट ब्लॉक का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है। समस्तीपुर में नून और गंगा का जलस्तर बढ़ने से विद्यापति नगर , मोहिउद्दीन नगर , मोहनपुर और पटोरी ब्लॉक में 60 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट हैं।
बाढ़ पीड़ितों के मदद के लिए सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया है। इस बीच कटिहार के कई ब्लॉक में पानी फैलने के बाद हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। भागलपुर ज़िले के नवगछिया में 16 गांव बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित है। खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड व शहर के दाननगर सहित अन्य क्षेत्रों में भी बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। उधर , मधेपुरा जेल के 545 कैदियों को सहरसा जेल भेज दिया गया है।
राज्य सरकार के मंत्री नीतीश मिश्र ने बताया कि राज्य सरकार ने ज़िले के बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए 10 करोड़ 65 लाख रुपये की राशि आवंटित की है। बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए फारबिसगंज और नरपंत के बीच विशेष राहत ट्रेन चलाई जा रही है। यह ट्रेन फारबिसगंज से राहत साम्रगी लेकर नरपंत तक जा रही है और वापसी में यह ट्रेन पीड़ितों को लेकर नरपतगंज तक आ रही है।
चिरंजीव ने प्रजाराज्यम नाम से राजनीति पार्टी बनाई
तिरुपति.टॉलीवुड के सुपर स्टार चिरंजीव ने प्रजाराज्यम नाम से राजनीति पार्टी बनाकर आंध्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका में आने की घोषणा आज कर दी है। धार्मिक नगरी तिरुपति में आज लगभग 9 लाख प्रशंसकों के मौजूदगी में उन्होंने अपनी इस नई पार्टी प्रजाराज्यम की विधिवत घोषणा कर दी हैं।उन्होनें घोषणा करते हुए कहा है कि उनकीं पार्टी जनता की पार्टी होगी और जनता की भलाई के लिए जो हो सकेगा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने चाहने वाले लाखों लोगों की मदद से आज यंहा तक पहुंचे है और आगे भी उनकी ही मदद से अपने मकसद में कामयाब होगें ।
आंध्रप्रदेश राजनीतिक लड़ाई बहुत रोचक होगी:चिरंजीव जब मंच से भाषण दे रहे थे तो उनकें लाखों प्रशंसकों ने कभी हाथ हिलाकर तो कभी तालियां बजाकर जमकर उनका उत्साहवर्धन किया। अपने सुपर हीरों के इस नए अवतार को देखकर चिरंजीव के लाखों प्रशंसक गदगद थे और रैली में आई भीड़ के उत्साह को देखकर साफ लगता है कि इस बार आंध्र के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लड़ाई बहुत रोचक होगी और सत्ता समीकरण में काफी बदलाव होने की संभावना है।
क्या एनटी रामाराव की तरह चलेगा जादू:राजनीति विश् लेषकों में इस बात को लेकर चर्चा अभी से शुरु हो गई है कि क्या चिरंजीव भी एनटी रामाराव के तरह राज्य की जनता पर अपना जादू चला सकेगें। और अगर वे सफल होते है तो यह देखना बड़ा रोचक होगा कि किस पार्टी का वोट बैंक प्रजाराज्यम के आने से कम होता है।
Tuesday, August 26, 2008
हिलेरी ने की ओबामा की ज़ोरदार वकालत
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जनमत सर्वेक्षण के नतीजे कहते हैं कि बहुत से डेमोक्रेट ओबामा के हक़ में नहीं हैं |
अपील.हिलेरी क्लिंटन डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनने की दौड़ में बराक ओबामा से पराजित होने के बाद दौड़ से हट चुकी हैं.कहा जा रहा है कि हिलेरी क्लिंटन और बराक ओबामा की प्रतिद्वंद्विता के चलते डेमोक्रेटिक पार्टी में दरार आ गई है और इसका फ़ायदा रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मैक्केन को मिल सकता है.
![]() ![]() हिलेरी क्लिंटन |
लेकिन इसकी संभावना को ख़त्म करने की कोशिश करते हुए हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "आपने चाहे मुझे वोट दिया हो या बराक ओबामा को, अब समय आ गया है हम एक उद्देश्य के लिए एक हो जाएँ."उन्होंने बराक ओबामा को अपना उम्मीदवार बताते हुए कहा, "हम एक ही टीम सदस्य हैं."हिलेरी क्लिंटन ने उत्साहित कार्यकर्ताओं के सामने जोशीला भाषण देते हुए रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मैक्केन को 'अपना सहयोगी और मित्र' बताया और फिर उनकी नीतियों की ज़ोरदार खिंचाई की.वर्तमान राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से जॉन मैक्केन को जोड़ते हुए उन्होंनमे कहा, "हमें पिछले आठ साल के और चार साल नहीं चाहिए."उन्होंने अमरीकी जनता की भलाई के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के नज़रिए को एक बार और दोहराया.
असफल एकता कपूर

धारावाहिक की स्क्रिप्ट पर काम शुरु हो गया है और यह दीवाली के आसपास प्रसारित होगा। उल्लेखनीय है कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से एकता ने देश के साथ ही विदेशों में भी सफलता के झंडे गाड़े थे।उसके बाद एकता ने जो भी काम हाथ में लिया, उन्हें कामयाबी मिलती गई। सफलता के मद में एकता ने एक के बाद एक शो बनाने शुरू किए और फिर वहीं हुआ, जो मास प्रोडक्ट बनाने से होता है। एकता लगातार असफल होती गईं।स्मृति इरानी द्वारा तुलसी का किरदार छोड़ने के बाद एकता ने दूसरी तुलसी खड़ी की, जो असफल साबित हुई। एकता ने फिर स्मृति से सुलह कर ली और उन्हें फिर से तुलसी बनाया, लेकिन रबर की तरह खिंचते जा रहे ‘क्योंकि’ में इस बार वे भी असफल रहीं।एकता ‘हम पांच’ सीरियल को नए सिरे से लेकर आईं, लेकिन यह पूरी तरह नाकाम रहा। उसके बाद एकता ने जोर-शोर से अपने पहले रियालिटी शो की घोषणा की, जो फुस्स साबित हुआ। ‘कौन जीते बॉलीवुड का टिकट’ शो के बारे में लोगों को ज्यादा कुछ पता नहीं है। इसके बाद एकता ने ‘महाभारत’ की शुरुआत की, लेकिन यह पहले एपिसोड से ही विवाद में रहा।एकता ने इसे अपनी स्टाइल में भव्य बनाने की कोशिश की, लेकिन इसकी टीआरपी बढ़ ही नहीं रही है। सूत्र ने बताया कि लगातार मिल रही असफलता से एकता परेशान हैं और अब वे फिर से सास-बहू के चक्कर में आ रही हैं। बालाजी की तरफ से जल्द ही सास-बहू पर आधारित एक धारावाहिक बनाया जाने वाला है। फिलहाल धारावाहिक के स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है।
शम्मी कपूर-गीता बाली के पुत्र आदित्य एक्टिंग में
मुंबई. शम्मी कपूर और (स्व.) गीता बाली के पुत्र आदित्य राज कपूर 52 साल की उम्र में बतौर एक्टर फिल्मों में उतरे हैं। वह ‘बॉबी’, ‘धरम करम’ और ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम्’ के निर्माण के दौरान अपने ताऊ राज कपूर के असिस्टेंट रहे थे और स्वतंत्र निर्देशन के रूप में भी उन्होंने तीन अंग्रेजी फिल्में- ‘शमाल’, ‘संभर सालसा’ और ‘डोंट स्टॉप ड्रीमिंग’ की हैं, लेकिन पहले उन्होंने कभी एक्टिंग नहीं की थी।बतौर एक्टर उनकी पहली फिल्म ‘दीवनगी ने हद कर दी’ का मुहरूत कल मुंबई के निकट मड आईलैंड स्थित ‘बज स्टूडियो’ में संपन्न हुआ, जिसका मुहूर्त क्लैप बोनी कपूर ने दिया। जितेन पुरोहित द्वारा निर्देशित की जा रही, ‘अशीमा क्रिएशंस’ की इस फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में आदित्य के अलावा न्यूयॉर्क के दीप और अश्मिता भी न्यूकमर्स हैं। आदित्य इसमें मुख्य खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं।वह कहते हैं- ‘हीरोगीरी, कॉमेडी, एक्शन, डांस वगैरह तो अब हीरो करने लगे हैं। मुझे लगा कि इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में विलेन की जगह खाली है, जिसे अपने कैरेक्टर्स में तरह-तरह के प्रयोग करने का स्कोप भी है। इसलिए मैं विलेन बनकर एक्टिंग में उतरा हूं।’ 52 साल की उम्र में एक्टिंग शुरू करने के बारे में आदित्य ने कहा- ‘मेरे खानदान में सब एक्टर्स थे, इसलिए मैंने सोचा कि मैं कुछ हटकर करूं। मैंने 5 साल तक अंकल राज कपूर का असिस्टेंट रहा, फिर छोटे-बड़े कई बिजनेस किए, दुबई में पहले हिंदी टीवी चैनल का 10 साल तक सीईओ रहा और 5 साल तक दिल्ली में बिÊानेस सलाहकार भी। इस दौरान दुबई वाले चैनल के लिए मैंने 200 प्रोग्राम और 3 अंग्रेजी फिल्में भी बनाईं।पर कहते हैं न, ख़ून कभी न कभी अपना रंग जरूर दिखाता है। मेरे अंदर मेरे मम्मी-डैडी के ख़ून ने जोर मारा और मैं भी कैमरे के सामने बतौर एक्टर आ खड़ा हुआ हूं। अब मैं नियमित रूप से फिल्मों में एक्टिंग करूंगा, लेकिन डायरेक्शन भी जारी रखूंगा। जल्दी ही मैं एक हिंदी फिल्म का डायरेक्शन शुरू करने वाला हूं।’
बॉलीवुड की नायिकाएं भरोसेमंद नहीं: ईशा

ईशा की बॉलीवुड की किसी भी नायिका के साथ दोस्ती नहीं है। उनका कहना है कि इस मामले में उनका अब तक का अनुभव कड़वा ही रहा है। लंबे अरसे बाद उनकी फिल्म ‘हाईजैक’ प्रदर्शित हो रही है। हालांकि फिल्म का प्रमोशन उतना नहीं हो पाया है, जितना होना चाहिए।इस बारे में पूछे जाने पर ईशा ने स्वीकार किया कि प्रमोशन से कम से कम दर्शकों तक फिल्म का नाम तो पहुंचता ही है। भले ही प्रदर्शित होने के बाद दर्शक फिल्म देखें या न देखें। उन्होंने कहा कि मैंने अब तक कई फिल्में की हैं, इनमें ज्यादातर असफल रही हैं तो कुछ सफल। बॉलीवुड की फिल्म साइन करना शादी करने जैसा ही है।शादी के बाद पारिवारिक जीवन सफल भी हो सकता है और नहीं भी। जब हम कोई फिल्म साइन करते हैं तो यही सोचते हैं कि यह सफल होगी। कई बार ऐसा नहीं हो पाता, क्योंकि कुछ बातें ऐसी रह जाती हैं जो दर्शकों को पसंद नहीं आतीं। मैं अपने बारे में बात करूं तो मैंने अपने अब तक के फिल्मी सफर का पूरा आनंद उठाया है।इस समय कम फिल्में करने के बारे में पूछने पर ईशा ने कहा कि मेरी रुचि क्रॉसओवर और ऑफबीट फिल्मों के प्रति है। मुझे वे फिल्में अच्छी लगती हैं जिनमें करने के लिए कुछ हो। अब मैंने तय किया है कि एक समय में एक ही फिल्म करूंगी। मां हेमा की फिल्म के बारे में उन्होंने बताया कि ‘एचएम क्रिएशंस’ की हम नए सिरे से शुरुआत करने जा रहे हैं। जल्द ही हम कुछ फिल्में शुरू करने वाले हैं।बॉलीवुड के दोस्तों के बारे में पूछने पर इशा ने कहा कि यहां दो नायिकाओं में अच्छी दोस्ती होना बहुत मुश्किल है। किसी नायिका पर दोस्त के रूप में आप भरोसा नहीं कर सकते, इसमें आपके धोखा खाने की आशंका ज्यादा।बॉलीवुड में मेरे सिर्फ दो ही अच्छे दोस्त हैं और वह हैं जाएद और फरदीन खान। शादी के बारे में पूछने पर ईशा ने कहा कि इस समय तो मैं अकेली ही हूं। जब शादी करूंगी तो इसकी घोषणा सार्वजनिक तौर पर करूंगी।
घर में बनाइए सपनों का ‘ताजमहल’
लंदन.यह बात चौकाने वाली हो सकती है कि जिस ताजमहल को 20 हजार मजदूरों ने 22 वर्ष में बनाकर खड़ा किया था, उसे आप अकेले ही एक से दो दिन में बना सकते हैं। दरअसल बच्चों के लिए प्लास्टिक के खिलौने बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी ‘लीगो’ ने ऐसे ब्लॉक बनाए हैं, जिन्हें जोड़कर ताजमहल की प्रतिकृति बनाई जा सकती है।आपके इस सपनों के ताजमहल की कीमत 16,066.5, रुपए (200 पाउंड) होगी। यह खिलौना अगले महीने से बाजार में उपलब्ध होगा और इसे ऑनलाइन भी खरीदा जा सकेगा।
बनाए गए 5,922 ब्लॉक :‘लीगो’ ने अपने 74 वर्ष के इतिहास में खिलौने का यह सबसे बड़ा मॉडल बनाया है। ताजमहल की इस प्रतिकृति को बनाने के लिए 5,922 ब्लॉकों का इस्तेमाल होगा। आपकी मोहब्बत का यह प्रतीक बनकर खड़ा होने पर 20 इंच (51 सेमी) चौड़ा और 16 इंच (41) ऊंचा होगा। इस ‘इमारत’ के गुंबदों, मीनारों व मेहराबों के लिए सफेद, नीले और सुनहरे ब्लॉक बनाए गए हैं।
बड़े बच्चों का खिलौना :कंपनी के अनुसार आधुनिक निर्माण तकनीक, दुर्लभ तत्व व रंग और स्थापत्य की वास्तविक रूपरेखा इस खिलौने की खासियत है। इसे विशेष रूप से ब्लॉक के खेल में माहिर 14 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए बनाया गया है। इन ब्लॉक्स के जरिये 35 से 40 घंटे में ‘ताजमहल’ खड़ा किया जा सकता है।
लंदन की प्रतिकृति भी बनाई :‘लीगो’ इससे पहले दुनिया के अन्य अजूबों की प्रतिकृति भी बना चुकी है। फ्रांस के एफिल टॉवर की प्रतिकृति 12 हजार रुपए में (150 पाउंड) बाजार में बिक रही है। कंपनी ने विंडसर स्थित लीगोलैंड थीम पार्क में लंदन और पेरिस शहर की सूक्ष्म प्रतिकृतियां भी बनाई हैं।
फरवरी में हो सकते हैं लोकसभा चुनाव
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने अगले लोकसभा चुनावों के टाइम-टेबल का संकेत देते हुए संसद का मानसून सत्र 17 अक्टूबर से बुलाए जाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि 21 नवंबर तक चलने वाले इस सत्र के बाद संसद का शीतकालीन सत्र शायद ही हो।संसदीय मामलों संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति की मंगलवार को हुई बैठक में संसद सत्र की अवधि को लेकर चर्चा के बाद सरकार ने यह फैसला किया। सरकार चुनाव का समय अगले वर्ष फरवरी-मार्च में मान रही है। इसी लिहाज से एक महीने से अधिक समय का यह सत्र रखा गया है। सरकार की कोशिश इसी सत्र में लेखानुदान लेने की होगी, लेकिन यदि ऐसा नहीं हो पाया तो दो-चार दिन का सत्र फिर बुलाया जा सकता है। गौरतलब है कि नई लोकसभा का गठन अगले वर्ष मई के दूसरे सप्ताह तक होना है। यूपीए के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक मार्च व अप्रैल में परीक्षाओं के चलते चुनाव कराना उचित नहीं होगा।चुनाव अभियान व चुनावों की अधिसूचना के लिए कम से कम दो माह का समय चाहिए। इस लिहाज से नवंबर अंत में या दिसंबर की शुरुआत में चुनावों की घोषणा की जा सकती है। मौजूदा सत्र का समय इसी सुविधा को ध्यान में रख तय किया गया है। संसद का यह सत्र हालांकि एक माह से अधिक चलेगा, लेकिन इस दौरान कामकाज के लिए बमुश्किल 15 दिन मिलेंगे। सरकार उम्मीद कर रही है कि तब तक परमाणु करार को हरी झंडी मिल चुकी होगी और अमरनाथ भूमि विवाद भी शांत हो चुका होगा।
तो तांत्रिकों का अड्डा है बापू का आश्रम

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ आगे आई माया

चिरंजीवी ने बनाई प्रजा राज्यम पार्टी
तिरुपति। अभिनेता चिरंजीवी ने मंगलवार को खुद को नेता के रूप में औपचारिक तौर पर लान्च किया। लान्चिंग बालाजी के धार्मिक शहर से हुई, लेकिन एकदम फिल्मी अंदाज में। हजारों समर्थकों की भीड़, नाच-गाना और कैमरा-लाइट के बीच उन्होंने अपनी पार्टी का नाम घोषित किया, 'प्रजा राज्यम'। उन्होंने सामाजिक न्याय के लिए काम करने और भ्रष्टाचार का समूल नाश करने को पार्टी का मुख्य एजेंडा बताया।इससे पहले चिरंजीवी ने लंबा भाषण दिया और उपस्थित भीड़ के साथ थोड़ा संवाद भी किया। पार्टी के नाम का ऐलान करते ही सभा स्थल पर गाने की धुन सुनाई देने लगी और मंच पर लगे विशाल स्क्रीन पर खूबसूरत दृश्य दिखाई देने लगे।53 ंवर्षीय अभिनेता ने हर क्षेत्र से जुड़ी अपनी पार्टी की नीतियों का खुलासा किया। उन्होंने तेलंगाना, नक्सलवाद सहित तमाम ज्वलंत मुद्दों पर बात की और कहा कि इन संवेदनशील मुद्दों पर अचानक कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि बुद्धिजीवी लोगों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही वह इन मुद्दों पर अपनी अंतिम राय कायम करेंगे।चिंरजीवी ने 120 एकड़ में फैले अविलाला टैंक मैदान में समर्थकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अपनी पार्टी के झंडे का भी अनावरण किया। झंडा हरा और सफेद रंग का है। बीच में सूर्य भी बना है। चिरंजीवी ने लगे हाथ चुनाव आयोग में पार्टी के रजिस्ट्रेशन की अर्जी भी दे दी।एक सिपाही के बेटे चिरंजीवी ने 148 फिल्मों में काम किया है और पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की प्रेरणा से अब वह राजनीति में उतरे हैं। उनके पहले राजनीतिक शो में उनकी एक झलक पाने को आतुर प्रशंसकों की भारी भीड़ जुटी थी। इस वजह से सभास्थल पर अफरातफरी का माहौल भी बन गया और पुलिस को लाठियां तक भांजनी पड़ी।इस बीच, नई दिल्ली में कांग्रेस ने चिरंजीवी की नई पार्टी की लांचिंग पर सधी हुई प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और आंध्रप्रदेश के प्रभारी वीरप्पा मोइली ने कहा कि इस नई पार्टी से कांग्रेस पर नहीं, बल्कि टीडीपी पर असर पड़ेगा।
Monday, August 25, 2008
'बेनामी' कानूनी कवायद
सरकार बेनामी संपत्तियों को उजागर करने के लिए इससे जुड़े कानून में संशोधन करने पर कथित तौर पर विचार कर रही है, हालांकि ऐसा मुश्किल ही लगता है। व्यापक संस्थागत सुधारों और राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए बगैर ऐसे कानूनों में कोई भी संशोधन इन्हें सिर्फ उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के औजार ही बना कर छोड़ेंगे। आज के दौर में रियल एस्टेट इकलौता ऐसा बड़ा धंधा है जिसके माध्यम से बड़े पैमाने पर काले धन को छुपाने का खेल किया जाता है। ऐसे में बेनामी संपत्तियां और खरीद-फरोख्त की कीमत को कम बताने के हथकंडे भ्रष्टाचार के सबसे कारगर औजार बन जाते हैं। बेनामी संपत्ति (विनिमय) कानून में प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिकारी एक ऐसी संपत्ति को बेनामी 'मान' लेंगे जिसके धारक के पास आय का कोई प्रत्यक्ष स्त्रोत नहीं होगा। संपत्ति को बेनामी 'मानने' संबंधी इस प्रावधान का नुकसान यह होगा कि बगैर संपत्ति के विवरण में गए इस पर जुर्माना लगाया जा सकेगा, यदि संपत्ति धारक उसे खरीदने संबंधी अपनी वित्तीय क्षमता का सबूत नहीं दे सके। भले ही यह प्रावधान कागजी तौर पर अच्छा लगे, लेकिन इससे काले धन पर आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचेगा। प्रॉपर्टी के बाजार में भ्रष्टाचार सिर्फ लक्षण है, असल मर्ज हमारे चुनावों में लगने वाला धन है। चुनावी खर्च पर रोक लगाए जाने के बाद अब राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के लिए जरूरी हो गया है कि वे अपना काला धन कहीं और निवेश करें। यहीं पर रियल एस्टेट उनके लिए रामबाण बन कर आता है। यह क्षेत्र न सिर्फ काले धन को पैदा करता है, बल्कि नेताओं को सहूलियत भी देता है।
अब संकेत साफ मिल रहे हैं कि सरकार देश की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में आर्थिक सुधारवादी बदलाव लाने जा रही है। पेंशन विधेयक पर सरकार की तैयारी के अलावा इसे इस बात से समझा जा सकता है कि उसने गैर-सरकारी पेंशन, ग्रेच्युटी और सुपरऐनुएशन फंड के लिए निवेश के मानकों को लचीला बना दिया है। इससे पहले ईपीएफ कोष के प्रबंधन को निजी कंपनियों द्वारा आउटसोर्स कराए जाने का कदम उठाया ही गया था।
ये सारे बदलाव हालांकि मामूली स्तर पर ही हो रहे हैं। जरूरत पेंशन पर एक ऐसी राष्ट्रीय नीति की है जो सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अपने भीतर समाविष्ट कर सके। आज पेंशन की कवरेज आय और पेशे पर आधारित होती है जिसका ढांचा बिखरा हुआ है जहां ईपीएफओ संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की रिटायरमेंट आय का प्रबंधन करता है, जबकि नई पेंशन नीति सरकारी कर्मचारियों को केंद्र में रखेगी। इसके अलावा कुछ ऐसे फंड हैं जो बड़ी कंपनियों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की देखरेख करते हैं और जिनका कोष अनुमान के आधार पर 50,000 करोड़ के आसपास है। इनके अलावा हम परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने वाली फर्मों यूटाआई और फ्रैंकलिन टेंपलटन द्वारा चलाई जाने वाली रिटायरमेंट योजनाएं और पीपीएफ समेत लघु पेंशन योजनाएं और बीमा फर्मों के कुछ उत्पाद भी मौजूद हैं।
इसका नतीजा यह होता है कि रिटायरमेंट के बाद अपने लिए बचत की चाह रखने वाले अधिकतर भारतीय उन पेंशन योजनाओं से वंचित रह जाते हैं जो पेशे के आधार पर भेदभाव नहीं करतीं। अब तक ईपीएफओ का प्रबंधन बहुत खराब रहा है। अब तक भारत के नीति निर्माताओं ने सामाजिक सुरक्षा या पेंशन योजनाओं को सेवा प्रदाता के नजरिये से ही देखा है, कर्मचारियों के नजरिये से नहीं। इन दिक्कतों को संबोधित करने के लिए एक नई नीति की तुरंत दरकार है। यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार को पेंशन और वित्त विधेयक में ऐसे बदलाव लाने चाहिए जिससे सभी योजनाएं पीएफ नियामक एजेंसी के दायरे में आ सकें। इस पर कोई भी टालमटोल पेंशन सुधारों पर प्रगति को बाधित कर सकती है।
अपहरण से बचने के लिए चिप
अहमदाबाद : जन्माष्टमी पर जुआ! यह कोई अनोखी बात नहीं। पर इस बार यह कहा जा रहा है कि कृष्ण जन्माष्टमी पर मर्द ही नहीं, औरतें भी क्लबों, होटलों और फार्महाउसों में जमकर जुआ खेलेंगी। कई होटलों में तो औरतों के लिए स्पेशल टेबल भी बुक किए गए हैं ताकि वे आराम से दांव लगा सकें। इसके अलावा किटी पार्टियों में भी ताश की जबरदस्त बाजियां लगाई जाने वाली हैं।
जैसा कि उर्वी शाह कहती हैं, हम किसी सहेली के घर इकट्ठा हो जाते हैं और वहां पर जुआ खेलते हैं। इससे हमारी रूटीन किटी पार्टियों में अलग ही रंग आ जाता है। हां, हम यह तय कर लेते हैं कि हमें किस हद तक दांव लगाना है। हम कोई पक्के जुआरी तो हैं नहीं। हमारा इरादा तो बस मजे करना होता है। तीन पत्ती यहां का सबसे पॉपुलर कार्ड गेम है। वैसे यहां हर तरह का खेल खेला जाता है- कलर्स, सीक्वेंस, ऑल्टरनेट, ऑड इवेन, डर्बी, सब कुछ। बहुत सी औरतें तो होटल मे कमरा बुक करके भी इस मजे को लूटने से पीछे नहीं हटतीं। इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ी कृपा कहती है, मेरी 30 सहेलियां जन्माष्टमी के दिन घर पर आ जाती हैं। सभी अपने-अपने घर से कुछ न कुछ पकाकर लाती हैं। हम सब मिलकर खाते-पीते हैं और इसके बाद ताश की बाजी लगती है। मजाल है कि कोई बाजी छोड़कर उठ जाए। इसे अशुभ माना जाता है। पोकर को पहले मर्दों का खेल माना जाता था। पर अब इसमें भी यह बंटवारा खत्म हो गया है। तीन पत्ती की तरह इसमें भी बस थोड़ा सा दिमाग लगाने की जरूरत होती है। उर्वी शाह कहती हैं, हम 10,000 रुपए से ज्यादा का जुआ नहीं खेलते। बस, मजे के लिए इतना ही काफी है।
मर्सिडीज लॉन्च करेगी लग्जरी बस
कंपनी इस बस के बारे में जानकारी देने से बच रही है। बस की चेसिस यूरोप से आयात की गई किटों को असेम्बल मर्सिडीज बेंज के पुणे के निकट चिकाली स्थित संयंत्र में तैयार की गई है।
मर्सिडीज की इस बस का मुकाबला वोल्वो की बस से होगा। ऐसी उम्मीद है कि मर्सिडीज अपनी बस की कीमत वोल्वो की बस के दाम के निकट ही रखेगी। वोल्वो की इंटर सिटी बसों की कीमत 75-80 लाख रुपए की रेंज में है।
ऐसा अनुमान है कि मर्सिडीज पहली कुछ बसों को प्रायोगिक आधार पर चुनिंदा ऑपरेटरों को सौंपेगी। इसे देखते हुए ऑटोमोटिव उद्योग के जानकारों ने इस बात की संभावना जताई है कि बस का दाम कुछ महंगा हो सकता है। इस बारे में संपर्क करने पर कंपनी के अधिकारियों ने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि सभी जानकारियां एक सितंबर को दी जाएंगी। जानकारों का कहना है, 'मर्सिडीज बेंज एक्ट्रॉस ट्रक की तरह ही अपनी बसों को भी चुनिंदा खरीदारों के लिए पेश कर सकती है। इसके अलावा बस का दाम इसकी विशेषताओं, ग्राहक की जरूरत के अनुसार किए गए बदलाव और इंजन के प्रकार पर निर्भर करेगा।' मर्सिडीज बेंज के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बस की बॉडी सतलुज मोटर्स अपने जालंधर के संयंत्र में बनाएगी। दूसरी ओर उद्योग के सूत्रों के अनुसार ऐसा हो सकता है कि बॉडी बिल्डर चाकन में कंपनी की ग्रीनफील्ड परियोजना में भी अपना संयंत्र लगा सकता है। मर्सिडीज बेंज कारों, ट्रक और बस की चेसिस की असेम्बली के लिए चाकन में 100 एकड़ के क्षेत्र में 5 करोड़ यूरो की लागत से एक परियोजना तैयार कर रही है। बसों के लिए कंपनी ने डीलर नेटवर्क तैयार कर लिया है। मर्सिडीज बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक विल्फ्रेड अल्बर ने हाल ही में कहा था कि वह सेल्स और सेवा नेटवर्क स्थापित करने के बाद ही बस को लॉन्च करेंगे। भारतीय बस बाजार में पिछले वित्त वर्ष में बिक्री 34 फीसदी बढ़कर 33,085 बसों की रही। इस बाजार के बड़े खिलाड़ियों में अशोक लेलैंड और टाटा मोटर्स शामिल हैं। लग्जरी बस सेगमेंट बाजार इस समय काफी छोटा है और इस पर वोल्वो बस इंडिया का कब्जा है। वोल्वो की 12 मीटर लंबी और 44 सीटों वाली बस काफी लोकप्रिय है। इस सेगमेंट को अभी केवल वोल्वो के नाम से जाना जाता है और मर्सिडीज बेंज के सामने इसे बदलने की बड़ी चुनौती होगी।
एक महीने में 92 लाख लोगों ने लिए मोबाइल कनेक्शन
नवाज ने सरकार से वापस लिया समर्थन
शरीफ ने कहा कि जरदारी के साथ उनका समझौता हुआ था कि अगर संसद भंग करने और प्रधानमंत्री को बर्खास्त करने के राष्ट्रपति के अधिकार खत्म नहीं किए गए तो राष्ट्रपति पद के लिए दलगत राजनीतिक से अलग रहने वाला कोई निष्पक्ष उम्मीदवार खड़ा किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पीपीपी सह-अध्यक्ष ने इस समझौते का उल्लंघन किया। 59 वर्षीय पीएमएल (एन) नेता ने कहा कि उनकी पार्टी 'रचनात्मक विपक्ष' की भूमिका निभाएगी और पाकिस्तान में वास्तविक लोकतंत्र लाने के लिए कोशिश जारी रखेगी। शरीफ ने वादा किया वे और उनकी पार्टी पाकिस्तान में स्वस्थ लोकतंत्र, स्वतंत्र न्यायापालिका और संवैधानिक शासन के लिए काम करती रहेगी। शरीफ ने यह भी कहा कि जब तक अपदस्थ जजों को बहाल नहीं किया जाता उनकी पार्टी संघर्ष करती रहेगी। बता दें कि पीपीपी ने 6 सितंबर को प्रस्तावित राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए जरदारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। जबकि शरीफ ने पूर्व चीफ जस्टिस सईदुज्जमां सिद्दीकी को सोमवार को अपनी पार्टी का उम्मीदवार नामित किया। पार्टी की बैठक के बाद शरीफ ने कहा कि पार्टी ने पूर्व चीफ जस्टिस से राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने का आग्रह किया है।
Sunday, August 24, 2008
90 दिनों तक देख सकते हैं अपने फेवरिट प्रोग्राम
मंत्रालय के सीनियर अधिकारी ने बताया कि हम आईपीटीवी गाइडलाइन में अनिवार्य कंटेंट स्टोरेज क्लॉस को जोड़ रहे हैं, जिसके बाद सर्विस प्रवाइडर को अब 90 दिनों तक अपने प्रसारित कार्यक्रमों को संभाल कर रखना होगा। कंस्यूमर जब प्रोग्राम देखने की डिमांड करेगा तो प्रवाइडर को उसे दिखाना होगा।
आइस-ऐज (इन्फॉर्मेशन, कम्यूनिकेशन और इन्टरटेनमेंट )के बदलाव में आईपीटीवी की सबसे अहम भूमिका है। इससे कम्यूनिकेशन के तीन माध्यम : टेलिफोन, इंटरनेट और सेटेलाइट टेलिविजन सर्विसेज की सुविधा एक ही साथ मिलेंगी। एमटीएनएल, बीएसएनएल, रिलायंस और भारती एयरटेल पहले ही देश के कई हिस्सों में आईपीटीवी का ट्रायल कर चुकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार 15 दिनों में आईपीटीवी डाउनलिंकिंग गाइडलाइन सार्वजनिक कर देगी। आईपीटीवी ब्रॉडकास्ट लाइसेंस हासिल करने के लिए टेलिकॉम ऑपरेटरों को तीन महत्वपूर्ण शर्त को पूरा करना होगा। शर्त के मुताबिक ऑपरेटर के पास 100 करोड़ रुपये की पूंजी होनी चाहिए। इसके साथ ही सुरक्षा नियमों के साथ छेड़-छाड़ ना करने की भी शर्त रखी गई है। तीसरी शर्त के मुताबिक सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा लगाए गए निगरानी तंत्र के खर्चे का भार सर्विस प्रवाइडर को ही उठानी होगी।